Class 12th Sociology ( समाज-शास्त्र ) ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART – 6

 


Q. 151. सामाजिक संसाधन क्या होते हैं ? इनके रूपों का उल्लेख कीजिए।

Ans ⇒ प्रत्येक समाज में कुछ लोगों के पास धन, सम्पदा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शक्ति जैसे मूल्यवान संसाधन होते हैं जिन्हें सामाजिक संसाधन कहा जाता है। यह सामाजिक संसाधन पूँजी के तीन रूपों में विभाजित किए जा सकते हैं –

(i) भौतिक सम्पत्ति एवं आय के रूप में आर्थिक पूँजी,
(ii) प्रतिष्ठा और शैक्षणिक योग्यताओं के रूप में सांस्कृतिक पूँजी,
(iii) सामाजिक संगतियों और संपर्कों के जाल के रूप में सामाजिक पूँजी।


Q. 152. सामाजिक विषमता को परिभाषित कीजिए व सामाजिक स्तरीकरण का अर्थ समझाइए।

Ans ⇒ सामाजिक विषमता- सामाजिक संसाधनों तक असमान पहुँच की पद्धति ही साधारणतया सामाजिक विषमता कहलाती है। इन सामाजिक संसाधनों में धन, सम्पदा, शिक्षा, शक्ति एवं रोजगार इत्यादि शामिल होते हैं।

सामाजिक स्तरीकरण – एक समाज में रह रहे लोगों का वर्गीकरण करके उन्हें एक अधिक्रमित संरचना में बाँटना सामाजिक स्तरीकरण कहलाता है। यह अधिक्रम लोगों की पहचान, अनुभव, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति से संबंध तथा साथ ही संसाधनों एवं अवसरों तक उनकी पहुँच को साकार देता है।


Q. 153. ‘सामाजिक स्तरीकरण पीढ़ी-दर-पीढ़ी बना रहता है।’ इस तर्क को स्पष्ट कीजिए।

Ans ⇒ स्तरीकरण परिवार और सामाजिक संसाधनों से घनिष्ठता से जुड़ा है। अर्थात् सामाजिक संसाधनों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी कोई-न-कोई उत्तराधिकार बनता रहता है। प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक स्थिति या प्रदत्त अर्थात् वे पहचान जो जन्म से ही निर्धारित होती है, अपने परिवार से ही प्राप्त होती है। जन्म ही व्यावसायिक अवसरों को निर्धारित करते हैं, जैसे-दलितों में सफाई, चमड़े का कार्य, मजदूर इत्यादि का कार्य। अतः यह तर्क उचित है कि स्तरीकरण पीढ़ी-दर-पीढ़ी बना रहता है। अर्थात् हमारी पहचान, व्यवसाय, गुण इत्यादि हमारी ही अगली पीढ़ी को अपनाने पड़ते हैं।


Q. 154. पूर्वाग्रह को परिभाषित कीजिए।

Ans ⇒ पूर्वाग्रह शब्द का उचित अर्थ है-‘पूर्वनिर्णय’ अर्थात् पहले ही निर्णय लेना। एक समूह के सदस्यों द्वारा दूसरे समूहों के सदस्यों के बारे में पूर्वनिर्णय लेना या व्यवहार इत्यादि पूर्वाग्रह कहलाता है। इसमें किसी व्यक्ति या समूह को जाने या पहचाने बिना ही नकारात्मक सोच या व्यवहार बना लिया जाता है। यह मनोवृत्ति और विचारों को दर्शाता है।


Q. 155. रुढिबद्ध धारणाओं से आप क्या समझते हैं ?

Ans ⇒ रुढिबद्ध धारणाएँ लोगों के एक समूह का निश्चित और अपरिवर्तनीय स्वरूप रुढिबद्ध धारणाएँ ज्यादातर नृजातीय और प्रजातीय समूहों और महिलाओं के संबंध में प्रयोग की जाती है। रुढिबद्ध धारणा पूरे समूह को एक समान रूप से स्थापित कर देती है। इस रुढिबद्ध धारणा के अंतर्गत व्यक्तिगत समयानुसार या परिस्थिति अनुरूप भिन्नता को भी नकार दिया जाता है।


Q. 156. भेदभाव शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

Ans ⇒ भेदभाव एक समूह या व्यक्ति के प्रति किया गया व्यवहार कहलाता है। यह व्यवहार सकारात्मक व नकारात्मक दोनों प्रकार के हो सकते हैं। भेदभाव के तहत एक समूह को उन सुविधाओं, नौकरियों से वंचित किया जा सकता है जो दूसरे समुदाय या जाति के लोगों के लिए खुले होते हैं। उदाहरण के लिए किसी क्षेत्र में एक समूह के व्यक्ति को नौकरी देना व दूसरे समूह के व्यक्ति को मना कर देना।


Q. 157. सामाजिक बहिष्कार क्या है ?

Ans ⇒  वे तौर-तरीके जिनके जरिए किसी व्यक्ति या समूह को समाज में पूरी तरह घुलने-मिलने से रोका जाता है। इन तरीकों के कारण किसी समूह को अन्य समूह से पृथक् या अलग रखा जाता है। यह किसी व्यक्ति या समूह को उन अवसरों या सुविधाओं से वंचित करते हैं जो अधिकांश जनसंख्या के लिए खुले होते हैं या अधिकांश जनसंख्या को प्राप्त होते हैं। सामाजिक बहिष्कार लोगों की इच्छाओं के विरुद्ध होता है।


Q. 158. आज जाति व्यवस्था में कौन-कौन से परिवर्तन हुए हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Ans ⇒ आधुनिक काल के साथ-साथ जाति व्यवस्था में काफी परिवर्तन हुए हैं जो इस प्रकार हैं
(i) जाति तथा व्यवसाय के बीच की कड़ी काफी कमजोर हुई है। इसके सम्बन्ध व्यवसाय से अधिक मजबूत नहीं हैं।
(ii) जाति तथा आर्थिक स्थिति के सह-संबंध काफी कमजोर हुए हैं अर्थात् आज गरीब व अमीर लोग हर जाति में पाए जाते हैं।
(iii) पहले की अपेक्षा अब जाति में व्यवसाय परिवर्तन आसान हो गया है, अर्थात् अब एक जाति के व्यक्ति दूसरे व्यवसाय को भी अपना सकते हैं।


Q. 159. जनजाति को परिभाषित कीजिए।

Ans ⇒ एक सामाजिक समूह जिसमें कई परिवार, कुल (वंशज) शामिल हो और नातेदारी, सजातीयता, सामान्य इतिहास अथवा प्रादेशिक-राजनीतिक संगठन के साझे संबंधों पर आधारित हो। जाति परस्पर अलग-अलग जातियों की अधिक्रमिक व्यवस्था है, जबकि जनजाति एक समावेशात्मक समूह होती है। .


Q. 160. दलित वर्गों के साथ क्या-क्या शोषण या अपमानजनक व्यवहार किए जाते हैं ?

Ans ⇒ (i) उन्हें पेयजल के स्रोतों से जल नहीं लेने दिया जाता है व न ही पीने दिया जाता है। उनके कुएँ, नल इत्यादि अलग बने होते हैं।
(ii) उन्हें धार्मिक उत्सवों, पूजा-आराधना, सामाजिक समारोहों में भाग नहीं लेने दिया जाता।
(iii) उनसे किसी विवाह शादी में नगाड़े बजवाना, धार्मिक उत्सवों में छोटे काम इत्यादि करवाए जाते हैं।
(iv) इसके अतिरिक्त उन्हें बड़े व्यक्तियों के सामने पगड़ी उतारकर, पहने हुए जूतों को हाथ में पकड़कर, सिर झुकाकर खड़े रहने व साफ कपड़े न पहन के जाना, इत्यादि कार्यों को करने के लिए जबरदस्ती की जाती है।


Q. 161. सामुदायिक पहचान क्यों आवश्यक हैं ? दो कारण बताइए।

Ans ⇒सामुदायिक पहचान अनेक कारण से आवश्यक हैं –
(i) ये सामुदायिक पहचानें ऐसे चिह्न होते हैं जिनके द्वारा किसी व्यक्ति को समाज में जाना जाता है।
(ii) व्यक्ति इन समुदायों से संबंधित होकर अत्यंत सुरक्षित एवं संतुष्ट महसूस करता है।


Q. 162. एकीकरण नीतियों का उद्देश्य बताइए।

Ans ⇒ एकीकरण नीतियाँ इस बात पर बल देती हैं कि सार्वजनिक संस्कृति को सामान्य राष्ट्रीय स्वरूप तक सीमित रखा जाए और गैर-राष्ट्रीय संस्कृतियों को निजी क्षेत्रों के लिए छोड़ दिया जाए। ये नीतियाँ शैली की दृष्टि से तो अलग होती है, परन्तु इनका उद्देश्य भिन्न नहीं होता। .


Q. 163. मुखिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

Ans ⇒ ग्राम पंचायत का प्रधान मुखिया होता है। इसका चुनाव ग्राम पंचायत के मतदाताओं द्वारा किया जाता है। इसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। यह ग्राम पंचायत की बैठक बुलाता है। ग्राम पंचायत की बैठक की अध्यक्षता मुखिया करता है। यदि किसी बैठक में मुखिया उपस्थित नहीं रहता है तो बैठक की अध्यक्षता उपमुखिया करता है। मुखिया के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव चुनाव के दो वर्ष बाद लाया जा सकता है। अविश्वास प्रस्ताव के लिए बुलायी गई बैठक में यदि ग्राम पंचायत के कुल सदस्यों में से दो-तिहाई सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में हो तो मुखिया को अपना पद छोड़ना पड़ता है। इसके अलावा यदि वह लगातार सरकारी निर्देशों का उल्लंघन करता है तो भी उसे पद से हटाया जा सकता है।


Q. 164. सीमान्त मानव से आप क्या समझते हैं ?

Ans ⇒ रॉबर्ट ई. पार्क ने सर्वप्रथम ‘सीमान्त मानव’ की अवधारणा प्रस्तुत की। इन्होंने सीमान्त मानव की परिभाषा इन शब्दों में दी है, “जो व्यक्ति दुविधा में उलझे होने के कारण अपने बारे में स्वयं कोई निर्णय लेने में असमर्थ होता है उसे हम सीमान्त मानव कहते हैं।” सीमान्तीकरण की प्रक्रिया का संबंध सीमान्त मानव की अवधारणा से है। ऐसा व्यक्ति संक्रमण की दशा में होता है। वह बाहरी समूहों के मूल्यों और व्यवहार के तरीकों से जुड़ने की कोशिश करता है, परंतु अपने समूह के मूल्यों से भी पूरी तरह अलग नहीं हो पाता है।


Q. 165. हित समूह और दबाव समूह में अंतर स्पष्ट करें।

Ans ⇒  हित समूह और दबाव समूह में निम्नलिखित अंतर है-

S.Nहित समूहदबाव समूह
1. इसका राजनीति से संबंध नहीं होता है।इसका राजनीति से प्रत्यक्ष संबंध होता है।
2. यह अपने हितों की रक्षा के लिए शासन प्रक्रिया को प्रभावित करने का लक्ष्य नहीं रखता है।यह राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए विशेष रूप से प्रयत्नशील रहता है।
3. यह अपने हितों की रक्षा के लिए प्रेरक साधनों का प्रयोग करता है।यह दबाव की तकनीकों का सहारा लेता है।

Q. 166. विश्व व्यापार संगठन क्या है ?

Ans ⇒ विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 1995 में हुई। यह एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने इसे स्थापित किया। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं सेवाओं का नियमन विभिन्न कानूनों एवं नीतियों द्वारा करता है।


Q. 167. छुआछूत पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
अथवा, अस्पृश्यता से आप क्या समझते हैं ?

Ans ⇒ छुआछूत या अस्पृश्यता जाति व्यवस्था का सबसे गंभीर सामाजिक परिणाम है। इसके कारण भारत को सम्पूर्ण विश्व के सामने कलंकित होना पड़ा है। विश्व के किसी भी समाज में इतनी अमानवीय और असमानकारी प्रथा का कभी विकास नहीं हुआ है। ऊँच जातियों द्वारा अछूत जातियों के प्रति अपनाये गये छुआछूत की भावना या भेदपूर्ण व्यवहार को अस्पृश्यता कहा जाता है। इसके कारण अछूतों को मंदिरों तथा मठों में प्रवेश का अधिकार नहीं था। वे सार्वजनिक कुआँ से पानी नहीं लेते थे। उनके स्पर्श से ऊँची जाति के लोग अपवित्र हो जाते थे। वेद पढ़ने और सुनने का अधिकार उन्हें नहीं था।


Q. 168. नगरीकरण को परिभाषित करें।

Ans ⇒ नगरीकरण एक गतिशील सामाजिक प्रक्रिया है जो ग्रामीण एवं नगरीय दोनों प्रकार के जीवन में परिलक्षित होते हैं। इस प्रक्रिया में नगरीयता का विकास होता है। नगरीकरण उस प्रक्रिया की ओर संकेत करता है जिसके माध्यम से नगरों का निर्माण होता है।ई० ई० बर्गल के शब्दों में, “ग्रामीण क्षेत्रों का नगरीय क्षेत्रों में बदलने की प्रक्रिया को हम नगरीकरण कहेंगे।”


Q. 169. साम्प्रदायिकता क्या है ?

Ans ⇒  साम्प्रदायिकता को एक विचारधारा माना जा सकता है जो कि यह बताती है कि समाज धार्मिक समुदायों में बँटा हुआ है, जिनके स्वार्थ एक-दूसरे से भिन्न हैं और कभी-कभी उनमें पारस्परिक विरोध भी होता है। यह विरोध झूठे आरोप लगाने से लेकर जान से मार देने तक का वीभत्स रूप धारण कर लेता है।


Q. 170. राष्ट्रवाद क्या है ?

Ans ⇒ राष्ट्रवाद एक राष्ट्रीय एवं मानवीय मुद्दा है, जिसके लिए स्वस्थ विचार, सहयोग, सौहार्द एवं सह-अस्तित्व की परम आवश्यकता है। भारत जैसे बहुजातीय, बहुधर्मी, बहुभाषीय एवं बहुसंस्कृति वाले देश में यह विशेष महत्वपूर्ण है। 1962 में राष्ट्रीयता सम्मेलन के प्रतिवेदन में लिखा गया, “एक प्रजातंत्र में केवल प्रजाओं के होने से ही काम नहीं चलता, समाज के सदस्यों को नागरिक बनना होगा और नागरिक केवल तभी संभव है जबकि प्रत्येक व्यक्ति यह अनुभव करे कि उसकी राष्ट्र से सम्पूर्ण एकात्मकता है जिसका कि वह एक अंग है।”


Q. 171. जातिविहीन राजनीति क्या है ?

Ans ⇒ जातिवाद को दूर करने में जातिविहीन राजनीति की आवश्यकता है। यद्यपि आज प्रत्येक राजनीतिक दल जातिविहीन समाज की वकालत करता है, परन्तु वास्तविकता यही है कि वे जातिवाद आधार पर ही राजनीति करते हैं। इस संदर्भ में अजातिगत दृष्टि की जरूरत है और जरूरत है अजातिगत व्यवहार के द्वारा जातिवाद को दूर करने की। अतः वर्तमान में जातिविहीन होकर सोचें और अजातिगत रूप से अपने कर्त्तव्य को निश्चित करें। .


Q. 172. नागा आंदोलन क्या है ?

Ans ⇒ नागा आंदोलन पृथकतावादी आंदोलन का रूप है। यह आंदोलन स्वतंत्र भारत के पूर्व से ही चल रहा है। इसका मूल उद्देश्य भारत से अलग एक नागालैंड राज्य की माँग करता रहा है। अनेक नागा संगठनों ने व्यवस्था एवं कानून का विरोध करना शुरू किया। विभिन्न हिंसक घटनाएँ हुईं। इसके परिणामस्वरूप 1961 में भारतीय गणराज्य में नागालैण्ड को एक राज्य के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इसके बावजूद अन्य मांगों के संदर्भ में आज भी नागा आंदोलन क्रियाशील है।


Q. 173. टोटम क्या है ?

Ans ⇒ जातियों में गोत्रों के नाम किसी ऋषि या काल्पनिक महापुरुष के नाम पर है जैसे वशिष्ठ भारद्वाज, कश्यप आदि। इसके विपरीत जनजाति में गोत्र टोटमों के आधार पर होते हैं जैसे कि मैसूर की कीमती जनजाति में आँवला, नींबू, कद्दू, चना, ईख, उरद, केला, अनार, .. गेहूँ, दाल, खजूर, गूलर, ईख, सरसों, चन्दन, कपूर, आदि गोत्र है।


Q. 174. दलित क्या है ?

Ans ⇒  दलित सामाजिक असमानता का वह रूप है जिसके आधार पर मनुष्य, मनुष्य के समीप आने, देखने और स्पर्श से अपवित्र हो जाते हैं। इन्हें सवर्ण जातियों से पृथक रहने की । व्यवस्था की गई तथा अनेक प्रकार की निर्योग्यताएँ निर्धारित की गईं।
डी० एन० मजूमदार ने लिखा है, “अस्पृश्य जातियाँ वे हैं जो अनेक सामाजिक और राजनीतिक निर्योग्यताओं की शिकार हैं, इनमें से अनेक निर्योग्यताएँ उच्च जातियों द्वारा परंपरागत तौर पर निर्धारित और सामाजिक तौर पर लागू की गई हैं।”


Q. 175. संचार क्या है ? .

Ans ⇒  संचार सामाजिक परिवर्तन की एक ऐसी संगठित साधनों की प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सूचनाओं, विचारों एवं क्रियाकलापों आदि को समुदाय के एक बड़े हिस्से तक पहुँचाना है। इसके तीन मुख्य रूप हैं –
(a) मुद्रित संचार – समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएँ आदि,
(b) विद्युत संचार – टेलीफोन, कम्प्यूटर एवं इन्टरनेट आदि और
(c) दृश्य-श्रव्य संचार – रेडियो एवं टेलीविजन आदि।


Q. 176. शिक्षा के प्रति समर्पण क्या है ?

Ans ⇒  शिक्षा मानव की एक बड़ी कृति है। इसने एक ओर मानव को सामाजिक प्राणी बनाया, तो दूसरी ओर नित नए-नए खोजों के माध्यम से समाज, राष्ट्र एवं विश्व को गति प्रदान की। इसलिए एक नागरिक के रूप में शिक्षा के प्रति समर्पण अनिवार्य है। हम न केवल स्वयं शिक्षित हों, बल्कि अपने आस-पास के लोगों में शिक्षा का माहौल दें। शिक्षा व्यक्ति एवं समाज से तीन रूपों में संबंधित है-(i) यह व्यक्ति में नैतिक गुणों का विकास करता है, (ii) यह व्यक्ति में समाज के प्रति योगदान को निर्धारित करता है, (iii) इसका संबंध आर्थिक विकास से है। वर्तमान शिक्षा को अधिकाधिक व्यवसायोन्मुख बनाया जा रहा है।


S.NClass 12th Sociology ( लघु उत्तरीय प्रश्न )
1.Sociology ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 1 
2.Sociology ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 2
3.Sociology ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 3
4.Sociology ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 4
5.Sociology ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 5
6.Sociology ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 6
S.NClass 12th Sociology ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) 
1.Sociology ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART – 1 
2.Sociology ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART – 2
3.Sociology ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART – 3
4.Sociology ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART – 4
5.Sociology ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART – 5
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